बर्मा (वर्तमान में म्यांमार) को भारत से अलग कर एक अलग देश बनाने के लिए कोई विशेष अधिनियम नहीं बनाया गया है। यह प्रक्रिया इतिहास में हुई एक प्राकृतिक विकास है जो अवधि बनाम आंशिक स्वतंत्रता की घोषणा और राष्ट्रीय एकीकरण के बाद हुई।
बर्मा को ब्रिटिश शासन में ब्रिटिश इंडिया के एक हिस्से के रूप में सम्मिलित किया गया था। 1937 में, भारत का विभाजन हुआ और भारत के संविधानिक परिवर्तन के बाद बर्मा को एक अलग प्रदेश के रूप में संरचित किया गया।
बर्मा ने 1948 में ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्रता प्राप्त की, और उसने अपनी स्वतंत्रता के बाद स्वतंत्रता घोषणा करके एक अलग देश के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद से बर्मा (म्यांमार) एक स्वायत्त राष्ट्र बन गया है।
तो, म्यांमार को भारत से अलग करने के लिए कोई विशेष अधिनियम नहीं था, बल्कि यह विभाजन और स्वतंत्रता की प्रक्रिया के बाद आयी नयी राजनीतिक और ज़मीनी परिस्थितियों का परिणाम था।

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